AI Summit खत्म हो चुका है. पांच दिन चले इस समिट में दुनिया भर के टेक सीईओ ने हिस्सा लिया. Nvidia के CEO Jensen Huang बीमारी की वजह से इस इवेंट में नहीं आ सके. लेकिन Open AI के Sam Altman, गूगल के सुंदर पिचाई, Anthropic के Dario Amodei जैसे बड़े नाम इसमें शामिल हुए.

इतने बड़े इवेंट को देखकर तो ऐसे लगता (Secret Behind AI Summit India 2026) है मानो हर टेक सीईओ के लिए इंडिया दूसरी पसंद है. ऑफकोर्स अमेरिका पहली है. इंडिया की युवा जनसंख्या वाला यूजर बेस और कमाल टैलेंट से भरे लोग शायद कारण होंगे.

एकदम ठीक बात. युवाओं से भरे और नई तकनीक को अपनाने में माहिर देश किस टेक कंपनी की पसंद नहीं होंगे. AI कंपनियों के LLM मॉडल को सिखाने के लिए इतना बड़ा बेस कहां मिलेगा. लेकिन यह सिक्के का एक पहलू है. एक दूसरा पहलू भी है जो अच्छा और बुरा भी है.

सवाल इंफ्रास्ट्रक्चर का है?
AI कंपनियों का प्रोडक्ट इस्तेमाल करने वाली कंपनियों का काम तो उनके क्लाउड स्टोरेज से चल जाता है. मगर AI कंपनियों का काम क्लाउड यानी आसमान से नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी जमीनों से चलता है. AI कंपनियों के डेटा सेंटर्स जहां GPU से लेकर स्टोरेज डिवाइस लगे होते हैं, उनको रखने के लिए जमीन की जरूरत होती है. जमीन से मतलब यहां किसी खुले मैदान से नहीं है. बड़ी-बड़ी बिल्डिंग जिसमें डेटा स्टोर होता है.